Verse 25
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥25॥
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥25॥
जो देवी सब प्राणियोंमें मातारूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
Verse 26
या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्त्स्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥26॥
नमस्तस्यै नमस्त्स्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥26॥
जो देवी सब प्राणियों में भ्रान्तिरूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
Verse 27
इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या।
भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नमः ॥27॥
भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नमः ॥27॥
जो जीवोंके इन्द्रियवर्गकी अधिष्ठात्री देवी एवं सब प्राणियोंमें सदा व्याप्त रहनेवाली हैं, उन व्याप्तिदेवीको बारम्बार नमस्कार है
Verse 28
चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद्व्याप्य स्थिता जगत्।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥28॥
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥28॥
जो देवी चैतन्यरूपसे इस सम्पूर्ण जगत्को व्याप्त करके स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
Verse 29
स्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रयात्तथासुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता।
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरीशुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः ॥29॥
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरीशुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः ॥29॥
पूर्वकालमें अपने अभीष्टकी प्राप्ति होनेसे देवताओंने जिनकी स्तुति की तथा देवराज इन्द्रने बहुत दिनोंतक जिनका सेवन किया, वह कल्याणकी साधनभूता ईश्वरी हमारा कल्याण और मङ्गल करे तथा सारी आपत्तियोंका नाश कर डाले
Verse 30
या साम्प्रतं चोद्धतदैत्यतापितैरस्माभिरीशाच सुरैर्नमस्यते।
या च स्मृता तत्क्षणमेव हन्तिनः सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभिः ॥30॥
या च स्मृता तत्क्षणमेव हन्तिनः सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभिः ॥30॥
उद्दण्ड दैत्योंसे सताये हुए हम सभी देवता जिन परमेश्वरीको इस समय नमस्कार करते हैं तथा जो भक्तिसे विनम्र पुरुषोंद्वारा स्मरण की जानेपर तत्काल ही सम्पूर्ण विपत्तियोंका नाश कर देती हैं, वे जगदम्बा हमारा संकट दूर करें
॥ इति तन्त्रोक्तं देवीसूक्तम् समाप्तं ॥