शङ्खचक्रगदाशार्ङ्गगृहीतपरमायुधे।
प्रसीद वैष्णवीरूपे नारायणि नमोऽस्तु ते ॥16॥
शङ्ख, चक्र, गदा और शार्ङ्गधनुषरूप उत्तम आयुधोंको धारण करनेवाली वैष्णवी शक्तिरूपा नारायणि! तुम प्रसन्न होओ। तुम्हें नमस्कार है ॥16॥
प्रसीद वैष्णवीरूपे नारायणि नमोऽस्तु ते ॥16॥
शङ्ख, चक्र, गदा और शार्ङ्गधनुषरूप उत्तम आयुधोंको धारण करनेवाली वैष्णवी शक्तिरूपा नारायणि! तुम प्रसन्न होओ। तुम्हें नमस्कार है ॥16॥
गृहीतोग्रमहाचक्रे दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।
वराहरूपिणि शिवे नारायणि नमोऽस्तु ते ॥17॥
हाथमें भयानक महाचक्र लिये और दाढ़ोंपर धरतीको उठाये वाराही रूपधारिणी कल्याणमयी नारायणि! तुम्हें नमस्कार है ॥17॥
वराहरूपिणि शिवे नारायणि नमोऽस्तु ते ॥17॥
हाथमें भयानक महाचक्र लिये और दाढ़ोंपर धरतीको उठाये वाराही रूपधारिणी कल्याणमयी नारायणि! तुम्हें नमस्कार है ॥17॥
नृसिंहरूपेणोग्रेण हन्तुं दैत्यान् कृतोद्यमे।
त्रैलोक्यत्राणसहिते नारायणि नमोऽस्तु ते ॥18॥
भयंकर नृसिंह रूप से दैत्योंके वधके लिये उद्योग करनेवाली तथा त्रिभुवनकी रक्षामें संलग्न रहनेवाली नारायणि! तुम्हें नमस्कार है ॥18॥
त्रैलोक्यत्राणसहिते नारायणि नमोऽस्तु ते ॥18॥
भयंकर नृसिंह रूप से दैत्योंके वधके लिये उद्योग करनेवाली तथा त्रिभुवनकी रक्षामें संलग्न रहनेवाली नारायणि! तुम्हें नमस्कार है ॥18॥
किरीटिनि महावज्रे सहस्रनयनोज्ज्वले।
वृत्रप्राणहरे चैन्द्रि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥19॥
मस्तकपर किरीट और हाथमें महावज्र धारण करनेवाली, सहस्र नेत्रोंके कारण उद्दीप्त दिखायी देनेवाली और वृत्रासुरके प्राणोंका अपहरण करनेवाली इन्द्रशक्ति रूपा नारायणी देवि! तुम्हें नमस्कार है ॥19॥
वृत्रप्राणहरे चैन्द्रि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥19॥
मस्तकपर किरीट और हाथमें महावज्र धारण करनेवाली, सहस्र नेत्रोंके कारण उद्दीप्त दिखायी देनेवाली और वृत्रासुरके प्राणोंका अपहरण करनेवाली इन्द्रशक्ति रूपा नारायणी देवि! तुम्हें नमस्कार है ॥19॥
शिवदूतीस्वरूपेण हतदैत्यमहाबले।
घोररूपे महारावे नारायणि नमोऽस्तु ते ॥20॥
शिवदूती रूपसे दैत्योंकी महती सेनाका संहार करनेवाली, भयंकर रूप धारण तथा विकट गर्जना करनेवाली नारायणि! तुम्हें नमस्कार है ॥20॥
घोररूपे महारावे नारायणि नमोऽस्तु ते ॥20॥
शिवदूती रूपसे दैत्योंकी महती सेनाका संहार करनेवाली, भयंकर रूप धारण तथा विकट गर्जना करनेवाली नारायणि! तुम्हें नमस्कार है ॥20॥
दंष्ट्राकरालवदने शिरोमालाविभूषणे।
चामुण्डे मुण्डमथने नारायणि नमोऽस्तु ते ॥21॥
दाढ़ोंके कारण विकराल मुखवाली मुण्डमालासे विभूषित मुण्डमर्दिनी चामुण्डारूपा नारायणि! तुम्हें नमस्कार है ॥21॥
चामुण्डे मुण्डमथने नारायणि नमोऽस्तु ते ॥21॥
दाढ़ोंके कारण विकराल मुखवाली मुण्डमालासे विभूषित मुण्डमर्दिनी चामुण्डारूपा नारायणि! तुम्हें नमस्कार है ॥21॥
लक्ष्मि लज्जे महाविद्ये श्रद्धे पुष्टिस्वधे* ध्रुवे।
महारात्रि* महाऽविद्ये* नारायणि नमोऽस्तु ते ॥22॥
लक्ष्मी, लज्जा, महाविद्या, श्रद्धा, पुष्टि, स्वधा, ध्रुवा, महारात्रि तथा महाअविद्यारूपा नारायणि! तुम्हें नमस्कार है ॥22॥
महारात्रि* महाऽविद्ये* नारायणि नमोऽस्तु ते ॥22॥
लक्ष्मी, लज्जा, महाविद्या, श्रद्धा, पुष्टि, स्वधा, ध्रुवा, महारात्रि तथा महाअविद्यारूपा नारायणि! तुम्हें नमस्कार है ॥22॥
मेधे सरस्वति वरे भूति बाभ्रवि तामसि।
नियते त्वं प्रसीदेशे नारायणि नमोऽस्तु ते* ॥23॥
मेधा, सरस्वती, वरा (श्रेष्ठा), भूति (ऐश्वर्यरूपा), बाभ्रवी (भूरे रंगकी अथवा पार्वती), तामसी (महाकाली), नियता (संयमपरायणा) तथा ईशा - (सबकी अधीश्वरी) रूपिणी नारायणि! तुम्हें नमस्कार है ॥23॥
नियते त्वं प्रसीदेशे नारायणि नमोऽस्तु ते* ॥23॥
मेधा, सरस्वती, वरा (श्रेष्ठा), भूति (ऐश्वर्यरूपा), बाभ्रवी (भूरे रंगकी अथवा पार्वती), तामसी (महाकाली), नियता (संयमपरायणा) तथा ईशा - (सबकी अधीश्वरी) रूपिणी नारायणि! तुम्हें नमस्कार है ॥23॥