Verse 17
त्राहि मां देवि दुष्प्रेक्ष्ये शत्रूणां भयवर्धिनि।
प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्री आग्नेय्यामग्निदेवता ॥17॥
प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्री आग्नेय्यामग्निदेवता ॥17॥
तुम्हारी ओर देखना भी कठिन है। शत्रुओं का भय बढ़ाने वाली जगदम्बिके! मेरी रक्षा करो। पूर्व दिशा में ऐन्द्री (इंद्रशक्ति) मेरी रक्षा करे। अग्निकोण में अग्निशक्ति, दक्षिण दिशा में वाराही तथा नैर्ऋत्यकोण में खड्गधारिणी मेरी रक्षा करे। पश्चिम दिशा में वारूणी और वायव्यकोण में मृगपर सवारी करने वाली देवी मेरी रक्षा करे
Verse 18
दक्षिणेऽवतु वाराही नैर्ऋत्यां खड्गधारिणी।
प्रतीच्यां वारुणी रक्षेद् वायव्यां मृगवाहिनी ॥18॥
प्रतीच्यां वारुणी रक्षेद् वायव्यां मृगवाहिनी ॥18॥
तुम्हारी ओर देखना भी कठिन है। शत्रुओं का भय बढ़ाने वाली जगदम्बिके! मेरी रक्षा करो। पूर्व दिशा में ऐन्द्री (इंद्रशक्ति) मेरी रक्षा करे। अग्निकोण में अग्निशक्ति, दक्षिण दिशा में वाराही तथा नैर्ऋत्यकोण में खड्गधारिणी मेरी रक्षा करे। पश्चिम दिशा में वारूणी और वायव्यकोण में मृगपर सवारी करने वाली देवी मेरी रक्षा करे
Verse 19
उदीच्यां पातु कौमारी ऐशान्यां शूलधारिणी।
ऊर्ध्वं ब्रह्माणि मे रक्षेदधस्ताद् वैष्णवी तथा ॥19॥
ऊर्ध्वं ब्रह्माणि मे रक्षेदधस्ताद् वैष्णवी तथा ॥19॥
उत्तर दिशा में कौमारी और ईशान-कोण में शूलधारिणी देवी रक्षा करे। ब्रह्माणि! तुम ऊपर की ओर से मेरी रक्षा करो और वैष्णवी देवी नीचे की ओर से मेरी रक्षा करे
Verse 20
एवं दश दिशो रक्षेच्चामुण्डा शववाहना।
जया मे चाग्रतः पातु विजया पातु पृष्ठतः ॥20॥
जया मे चाग्रतः पातु विजया पातु पृष्ठतः ॥20॥
इसी प्रकार शव को अपना वाहन बनाने वाली चामुण्डा देवी दसों दिशाओं में मेरी रक्षा करे। जया आगे से और विजया पीछे की ओर से मेरी रक्षा करे
Verse 21
अजिता वामपार्श्वे तु दक्षिणे चापराजिता।
शिखामुद्योतिनि रक्षेदुमा मूर्ध्नि व्यवस्थिता ॥21॥
शिखामुद्योतिनि रक्षेदुमा मूर्ध्नि व्यवस्थिता ॥21॥
वाम भाग में अजिता और दक्षिण भाग में अपराजिता रक्षा करे। उद्द्योतिनी शिखा की रक्षा करे। उमा मेरे मस्तक पर विराजमान होकर रक्षा करे
Verse 22
मालाधरी ललाटे च भ्रुवौ रक्षेद् यशस्विनी।
त्रिनेत्रा च भ्रुवोर्मध्ये यमघण्टा च नासिके ॥22॥
त्रिनेत्रा च भ्रुवोर्मध्ये यमघण्टा च नासिके ॥22॥
ललाट में मालाधारी रक्षा करे और यशस्विनी देवी मेरे भौहों का संरक्षण करे। भौहों के मध्यभाग में त्रिनेत्रा और नथुनों की यमघण्टा देवी रक्षा करे
Verse 23
शङ्खिनी चक्षुषोर्मध्ये श्रोत्रयोर्द्वारवासिनी।
कपोलौ कालिका रक्षेत्कर्णमूले तु शाङ्करी ॥23॥
कपोलौ कालिका रक्षेत्कर्णमूले तु शाङ्करी ॥23॥
दोनों नेत्रों के मध्य भाग में शङ्खिनी और कानों में द्वारवासिनी रक्षा करे। कालिका देवी कपोलों की तथा भगवती शांकरी मूलभाग की रक्षा करे
Verse 24
नासिकायां सुगन्धा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका।
अधरे चामृतकला जिह्वायां च सरस्वती ॥24॥
अधरे चामृतकला जिह्वायां च सरस्वती ॥24॥
नासिका में सुगन्धा और ऊपर के ओठ में चर्चिका देवी रक्षा करे। नीचे के ओठ में अमृतकला तथा जिह्वा में सरस्वती देवी रक्षा करे