Verse 16
महाविद्या महावाणी भारती वाक् सरस्वती।
आर्या ब्राह्मी कामधेनुर्वेदगर्भा च धीश्वरी ॥16॥
आर्या ब्राह्मी कामधेनुर्वेदगर्भा च धीश्वरी ॥16॥
महाविद्या, महावाणी, भारती, वाक्, सरस्वती, आर्या, ब्राह्मी, कामधेनु, वेदगर्भा और धीश्वरी (बुद्धिकी स्वामिनी) - ये तुम्हारे नाम होंगे
Verse 17
अथोवाच महालक्ष्मीर्महाकालीं सरस्वतीम्।
युवां जनयतां देव्यौ मिथुने स्वानुरूपतः ॥17॥
युवां जनयतां देव्यौ मिथुने स्वानुरूपतः ॥17॥
तदनन्तर महालक्ष्मीने महाकाली और महासरस्वतीसे कहा - 'देवियो! तुम दोनों अपने-अपने गुणोंके योग्य स्त्री-पुरुषके जोड़े उत्पन्न करो'
Verse 18
इत्युक्त्वा ते महालक्ष्मीः ससर्ज मिथुनं स्वयम्।
हिरण्यगर्भौ रुचिरौ स्त्रीपुंसौ कमलासनौ ॥18॥
हिरण्यगर्भौ रुचिरौ स्त्रीपुंसौ कमलासनौ ॥18॥
उन दोनोंसे यों कहकर महालक्ष्मीने पहले स्वयं ही स्त्री- पुरुषका एक जोड़ा उत्पन्न किया। वे दोनों हिरण्यगर्भ (निर्मल ज्ञानसे सम्पन्न) सुन्दर तथा कमलके आसनपर विराजमान थे। उनमेंसे एक स्त्री थी और दूसरा पुरुष
Verse 19
ब्रह्मन् विधे विरिञ्चेति धातरित्याह तं नरम्।
श्रीः पद्मे कमले लक्ष्मीत्याह माता च तां स्त्रियम् ॥19॥
श्रीः पद्मे कमले लक्ष्मीत्याह माता च तां स्त्रियम् ॥19॥
तत्पश्चात् माता महालक्ष्मीने पुरुषको ब्रह्मन्! विधे! विरिञ्च! तथा धातः! इस प्रकार सम्बोधित किया और स्त्रीको श्री! पद्मा! कमला! लक्ष्मी! इत्यादि नामोंसे पुकारा
Verse 20
महाकाली भारती च मिथुने सृजतः सह।
एतयोरपि रूपाणि नामानि च वदामि ते ॥20॥
एतयोरपि रूपाणि नामानि च वदामि ते ॥20॥
इसके बाद महाकाली और महासरस्वतीने भी एक-एक जोड़ा उत्पन्न किया। इनके भी रूप और नाम मैं तुम्हें बतलाता हूँ
Verse 21
नीलकण्ठं रक्तबाहुं श्वेताङ्गं चन्द्रशेखरम्।
जनयामास पुरुषं महाकाली सितां स्त्रियम् ॥21॥
जनयामास पुरुषं महाकाली सितां स्त्रियम् ॥21॥
महाकालीने कण्ठमें नील चिह्नसे युक्त, लाल भुजा, श्वेत शरीर और मस्तकपर चन्द्रमाका मुकुट धारण करनेवाले पुरुषको तथा गोरे रंगकी स्त्रीको जन्म दिया
Verse 22
स रुद्रः शङ्करः स्थाणुः कपर्दी च त्रिलोचनः।
त्रयी विद्या कामधेनुः सा स्त्री भाषाक्षरा स्वरा ॥22॥
त्रयी विद्या कामधेनुः सा स्त्री भाषाक्षरा स्वरा ॥22॥
वह पुरुष रुद्र, शंकर, स्थाणु, कपर्दी और त्रिलोचन के नामसे प्रसिद्ध हुआ तथा स्त्रीके त्रयी, विद्या, कामधेनु, भाषा, अक्षरा और स्वरा - ये नाम हुए
Verse 23
सरस्वती स्त्रियं गौरीं कृष्णं च पुरुषं नृप।
जनयामास नामानि तयोरपि वदामि ते ॥23॥
जनयामास नामानि तयोरपि वदामि ते ॥23॥
राजन्! महासरस्वतीने गोरे रंगकी स्त्री और श्याम रंगके पुरुषको प्रकट किया। उन दोनोंके नाम भी मैं तुम्हें बतलाता हूँ