खण्डं* खण्डं च चक्रेण वैष्णव्या दानवाः कृताः।
वज्रेण चैन्द्रीहस्ताग्रविमुक्तेन तथापरे ॥40॥
वैष्णवी ने भी अपने चक्रसे दानवोंके टुकड़े-टुकड़े कर डाले। ऐन्द्री के हाथसे छूटे हुए वज्रसे भी कितने ही प्राणोंसे हाथ धो बैठे ॥40॥
वज्रेण चैन्द्रीहस्ताग्रविमुक्तेन तथापरे ॥40॥
वैष्णवी ने भी अपने चक्रसे दानवोंके टुकड़े-टुकड़े कर डाले। ऐन्द्री के हाथसे छूटे हुए वज्रसे भी कितने ही प्राणोंसे हाथ धो बैठे ॥40॥
केचिद्विनेशुरसुराः केचिन्नष्टा महाहवात्।
भक्षिताश्चापरे कालीशिवदूतीमृगाधिपैः॥ॐ ॥41॥
कुछ असुर नष्ट हो गये, कुछ उस महायुद्धसे भाग गये तथा कितने ही काली, शिवदूती तथा सिंहके ग्रास बन गये ॥41॥
भक्षिताश्चापरे कालीशिवदूतीमृगाधिपैः॥ॐ ॥41॥
कुछ असुर नष्ट हो गये, कुछ उस महायुद्धसे भाग गये तथा कितने ही काली, शिवदूती तथा सिंहके ग्रास बन गये ॥41॥