ADVERTISEMENT
Invest Smart Ad

Right Ad Space

SHRI DURGA SAPTSHATI

अष्टम अध्याय

ASHTAM ADHYAY (Page 1)

ध्यानम्

ॐ अरुणां करुणातरङ्गिताक्षीं

धृतपाशाङ्कुशबाणचापहस्ताम्।

अणिमादिभिरावृतां मयूखै-

रहमित्येव विभावये भवानीम्
ध्यान:
॥ श्रीदुर्गासप्तशती - अष्टमोऽध्यायः ॥
रक्तबीज-वध

॥ ध्यानम् ॥
ॐ अरुणां करुणातरङ्गिताक्षीं

धृतपाशाङ्कुशबाणचापहस्ताम्।

अणिमादिभिरावृतां मयूखै-

रहमित्येव विभावये भवानीम्॥

"ॐ" ऋषिरुवाच ॥1॥

॥ अष्टमोऽध्यायः ॥
रक्तबीज-वध

॥ ध्यान ॥
मैं अणिमा आदि सिद्धिमयी किरणोंसे आवृत भवानीका ध्यान करता (करती) हूँ। उनके शरीरका रंग लाल है, नेत्रोंमें करुणा लहरा रही है तथा हाथोंमें पाश, अङ्कुश, बाण और धनुष शोभा पाते हैं।

ऋषि कहते हैं - ॥1॥
चण्डे च निहते दैत्ये मुण्डे च विनिपातिते।

बहुलेषु च सैन्येषु क्षयितेष्वसुरेश्वरः ॥2॥

चण्ड और मुण्ड नामक दैत्योंके मारे जाने तथा बहुत-सी सेनाका संहार हो जानेपर दैत्योंके राजा प्रतापी शुम्भ के मनमें बड़ा क्रोध हुआ और उसने दैत्योंकी सम्पूर्ण सेनाको युद्धके लिये कूच करनेकी आज्ञा दी ॥2-3॥
ततः कोपपराधीनचेताः शुम्भः प्रतापवान्।

उद्योगं सर्वसैन्यानां दैत्यानामादिदेश ह ॥3॥

चण्ड और मुण्ड नामक दैत्योंके मारे जाने तथा बहुत-सी सेनाका संहार हो जानेपर दैत्योंके राजा प्रतापी शुम्भ के मनमें बड़ा क्रोध हुआ और उसने दैत्योंकी सम्पूर्ण सेनाको युद्धके लिये कूच करनेकी आज्ञा दी ॥2-3॥
अद्य सर्वबलैर्दैत्याः षडशीतिरुदायुधाः।

कम्बूनां चतुरशीतिर्निर्यान्तु स्वबलैर्वृताः ॥4॥

वह बोला - 'आज उदायुध नामके छियासी दैत्य सेनापति अपनी सेनाओंके साथ युद्धके लिये प्रस्थान करें। कम्बु नामवाले दैत्योंके चौरासी सेनानायक अपनी वाहिनीसे घिरे हुए यात्रा करें ॥4॥
कोटिवीर्याणि पञ्चाशदसुराणां कुलानि वै।

शतं कुलानि धौम्राणां निर्गच्छन्तु ममाज्ञया ॥5॥

पचास कोटिवीर्य-कुलके और सौ धौम्र-कुलके असुरसेनापति मेरी आज्ञासे सेनासहित कूच करें ॥5॥
कालका दौर्हृदा मौर्याः कालकेयास्तथासुराः।

युद्धाय सज्जा निर्यान्तु आज्ञया त्वरिता मम ॥6॥

कालक, दौर्हृद, मौर्य और कालकेय असुर भी युद्धके लिये तैयार हो मेरी आज्ञासे तुरंत प्रस्थान करें' ॥6॥
इत्याज्ञाप्यासुरपतिः शुम्भो भैरवशासनः।

निर्जगाम महासैन्यसहस्रैर्बहुभिर्वृतः ॥7॥

भयानक शासन करनेवाला असुरराज शुम्भ इस प्रकार आज्ञा दे सहस्रों बड़ी-बड़ी सेनाओंके साथ युद्धके लिये प्रस्थित हुआ ॥7॥

© 2026 Durga Saptshati Pallabhav Technosoft. All Rights Reserved.