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SHRI DURGA SAPTSHATI

पंचम अध्याय

PANCHAM ADHYAY (Page 10)

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता॥

नमस्तस्यै ॥71॥

जो देवी सब प्राणियोंमें मातारूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥71-73॥
नमस्तस्यै ॥72॥

जो देवी सब प्राणियोंमें मातारूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥71-73॥
नमस्तस्यै नमो नमः ॥73॥

जो देवी सब प्राणियोंमें मातारूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥71-73॥
या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता॥

नमस्तस्यै ॥74॥

जो देवी सब प्राणियोंमें भ्रान्तिरूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥74-76॥
नमस्तस्यै ॥75॥

जो देवी सब प्राणियोंमें भ्रान्तिरूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥74-76॥
नमस्तस्यै नमो नमः ॥76॥

जो देवी सब प्राणियोंमें भ्रान्तिरूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥74-76॥
इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या।

भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नमः ॥77॥

जो जीवोंके इन्द्रियवर्गकी अधिष्ठात्री देवी एवं सब प्राणियोंमें सदा व्याप्त रहनेवाली हैं, उन व्याप्तिदेवीको बारम्बार नमस्कार है ॥77॥
चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद् व्याप्य स्थिता जगत्।

नमस्तस्यै ॥78॥

जो देवी चैतन्यरूपसे इस सम्पूर्ण जगत्को व्याप्त करके स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥78-80॥

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