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SHRI DURGA SAPTSHATI

पंचम अध्याय

PANCHAM ADHYAY (Page 7)

या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता॥

नमस्तस्यै ॥47॥

जो देवी सब प्राणियोंमें शान्तिरूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥47-49॥
नमस्तस्यै ॥48॥

जो देवी सब प्राणियोंमें शान्तिरूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥47-49॥
नमस्तस्यै नमो नमः ॥49॥

जो देवी सब प्राणियोंमें शान्तिरूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥47-49॥
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता॥

नमस्तस्यै ॥50॥

जो देवी सब प्राणियोंमें श्रद्धारूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥50-52॥
नमस्तस्यै ॥51॥

जो देवी सब प्राणियोंमें श्रद्धारूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥50-52॥
नमस्तस्यै नमो नमः ॥52॥

जो देवी सब प्राणियोंमें श्रद्धारूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥50-52॥
या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता॥

नमस्तस्यै ॥53॥

जो देवी सब प्राणियोंमें कान्तिरूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥53-55॥
नमस्तस्यै ॥54॥

जो देवी सब प्राणियोंमें कान्तिरूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥53-55॥

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