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SHRI DURGA SAPTSHATI

पंचम अध्याय

PANCHAM ADHYAY (Page 17)

देव्युवाच ॥127॥

देवीने कहा - ॥127॥
एवमेतद् बली शुम्भो निशुम्भश्चातिवीर्यवान्।

किं करोमि प्रतिज्ञा मे यदनालोचिता पुरा ॥128॥

तुम्हारा कहना ठीक है, शुम्भ बलवान् हैं और निशुम्भ भी बड़े पराक्रमी हैं; किंतु क्या करूँ? मैंने पहले बिना सोचे-समझे प्रतिज्ञा कर ली है ॥128॥
स त्वं गच्छ मयोक्तं ते यदेतत्सर्वमादृतः।

तदाचक्ष्वासुरेन्द्राय स च युक्तं करोतु तत्*॥ॐ ॥129॥

अतः अब तुम जाओ; मैंने तुमसे जो कुछ कहा है, वह सब दैत्यराजसे आदरपूर्वक कहना। फिर वे जो उचित जान पड़े, करें ॥129॥

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