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SHRI DURGA SAPTSHATI

पंचम अध्याय

PANCHAM ADHYAY (Page 6)

नमस्तस्यै ॥39॥

जो देवी सब प्राणियोंमें क्षान्ति- (क्षमा-) रूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥38-40॥
नमस्तस्यै नमो नमः ॥40॥

जो देवी सब प्राणियोंमें क्षान्ति- (क्षमा-) रूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥38-40॥
या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता॥

नमस्तस्यै ॥41॥

जो देवी सब प्राणियोंमें जातिरूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥41-43॥
नमस्तस्यै ॥42॥

जो देवी सब प्राणियोंमें जातिरूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥41-43॥
नमस्तस्यै नमो नमः ॥43॥

जो देवी सब प्राणियोंमें जातिरूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥41-43॥
या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता॥

नमस्तस्यै ॥44॥

जो देवी सब प्राणियोंमें लज्जारूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥44-46॥
नमस्तस्यै ॥45॥

जो देवी सब प्राणियोंमें लज्जारूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥44-46॥
नमस्तस्यै नमो नमः ॥46॥

जो देवी सब प्राणियोंमें लज्जारूपसे स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है ॥44-46॥

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